ग्रहांचा परिचय
- डॉ. सुधीर पिंपळे
|
ग्रहांची दृष्टी
1. प्रत्येक ग्रह ज्या स्थानावर असतो त्याच्या सातव्या स्थानी त्यांची पूर्ण दृष्टी असते.
2. मंगळ जिथे राहतो तिथून चवथ्या, सातव्या व आठव्या स्थानावर त्याची दृष्टी असते.
3. गुरुच्या स्थानापासून पाचव्या, सातव्या व नवव्या स्थानावर त्याची नजर असते.
4. शनीच्या स्थानापासून तिसर्या, सातव्या व दहाव्या स्थानावर तो पूर्ण लक्ष ठेवतो.
प्रत्येक ग्रह ज्या जागी, ज्या राशीत बसतो त्यानुसार त्या ग्रहाचे शुभाशुभ फळ मिळते. ग्रहांची एक चरण, द्विचरण दृष्टी असते त्यासाठी बारीक निरीक्षण व अभ्यासाची गरज आहे.
ग्रहांचे थोडक्यात विवेचन
ग्रहांचे नाव |
ग्रहांच्या राशी | ग्रहांची नक्षत्रे |
ग्रहाचा कालावदी एका राशीतला | ग्रहांचे रंग |
रत्न | |
सुर्य | सिंह |
कृतिका, उत्तरा, उत्तराषाढा | एक महिना |
मोतिया | माणिक | |
चंद्र |
कर्क | रोहीणी, हस्त, श्रवण |
सव्वादोनं महिने | पांढरा |
मोती | |
मंगळ | मेष, वृश्चिक |
मृग, चित्रा, घनिष्ठा | दिड महिना |
लाल | रत्न | |
बुध |
मिथुन, कन्या | अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती |
पावणेदोन महिने | हिरवा | पाचू |
शुक्र | वृषभ, तुळ | भरणी, पूर्वा, पूर्वाषाढा |
पावणेदोन महिने | पांढरा |
हिरा | |
गुरु | धनु, मीन |
पुनर्वसु, विशाखा | तेरा महिने |
पिवळा | पुष्कराज | |
शनी |
मकर, कुंभ | पुष्य, अनुराधा, उत्तर भाद्रपदा |
अडीच महिने | काळा | निलम |
राहू | आर्दा, स्वाती, शततारका |
दिड वर्ष | तपकिरी | गोमेद |
केतू | अश्विनी, मघा, मूळ |
दिड वर्ष | तपकिरी | स्फटीक |
घराचा होरा :-
घराच्या आतल्या रचनेनुसार त्याच्या कारक ग्रहांचे फळ समजले पाहिजे. जसे देवघरात, कोठीघर बांधले असेल तर ते गुरु-शनीच्या युतीचे फळ आहे. जर बैठक खोलीच्या जवळ शौचालय असेल तर ते बुध व केतूच्या युतीचे फळ आहे.
(अनुवाद- सौ. भाग्यश्री कुलकर्णी)
