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जन्मपत्रिका
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- डॉ. सुधीर पिंपळे
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अनुवाद- सौ. भाग्यश्री कुलकर्णी
ज्योतिषशास्त्रात संपूर्ण विश्वाला 360 अंशात विभागले आहे. ज्यात 12 राशी, 27 नक्षत्र, 9 ग्रह, 2 पाप ग्रह राहू-केतू या सर्वांची माहिती आपण जन्मपत्रिकेच्या 12 भागात अथवा स्थानात करतो. ते समजून घेण्यासाठी खालील कोष्टक पाहू.
बारा भावांची (स्थानांची) नावे केंद्र | 1,4,7,10 भाव | फणपर | 2,5,8,11 भाव | टाले क्लिम | 3,6,9,12 भाव | त्रिकोण | 5,6 भाव |
जन्मपत्रिकेच्या 12 भावांचे संक्षिप्त वर्णन भाव | भावाचा स्वामी | भावाचे नाव | भावाचे संक्षिप्त वर्णन | प्रथम | सूर्य | तनू-लग्न | रूप, चेहरेपट्टी, जन्मखुण, आयुष्य सुख, विवेक, शील व मस्तका कृती | द्वितीय | गुरु | धन-कुटुंब | कुल, मित्र, डोळे, कान, आवाज, मान, सौंदर्य, प्रेम, सुख, भोग, साठा,धन, सोने,चांदी ही संपत्ती | तृतीय | मंगळ | पराक्रम-भातृ | पराक्रम, दागिने, दान, कर्म, आयुष्य, शौर्य, धैर्य, क्षमा, दया, गायन, योगाभ्यास | चतुर्थ | चंद्र | सुख-गृह | आई-वडीलांचे, सुख, घर, वाहन, शांती, घर संपत्ती, बाग-बगिचा | पंचम | गुरु | बुद्धी-संतान | बुद्धी, मुलेबाळे, विद्या, विनयशीलता, आईचे सुख, पैशाची प्राप्ती, प्रेयसी | षष्ठ | मंगळ | रिपु-शंभू | रोग, शत्रु, पिडा | सप्तम | शुक्र | विवाह-भागीदार स्त्री | भागीदार स्त्री, भागीदार, व्यवसाय, आरोग्य, व्यापार | अष्टम | शनी | आयुष्य | आयुष्य, व्याधी, मृत्यू, मानसिक चिंता | नवम | गुरु | भाग्य-धन | भाग्य, मंगल कार्य, धर्म, विद्या, प्रवास, यश | दशम | शनी | व्यापार-कार्य | कर्म, राज्य, मान, प्रतिष्ठा, नोकरी, व्यापार, ऐश्वर्य, कीर्ती, नेतृत्व | एकादश | गुरु | लाभ-आय | आय, धन, मंगलकार्य, संपत्ती, वाहन, ऐश्वर्य | द्वादश | शनी | व्यय | हानी, दान, व्यय, दंड, व्यसन, रोग |
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