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Last Modified: सोमवार, 22 डिसेंबर 2025 (07:58 IST)

Shrikalantaka Ashtakam श्रीकालान्तकाष्टकम्

Shrikalantaka Ashtakam  Stotram Lyrics in Marathi
श्रीकालान्तकाष्टकम्
 
कमलापतिमुखसुरवरपूजित काकोलभासितग्रीव ।
काकोदरपतिभूषण कालान्तक पाहि पार्वतीनाथ ॥१॥
 
 कमलाभिमानवारणदक्षाङ्घ्रे विमलशेमुषीदायिन् ।
नतकामितफलदायक कालान्तक पाहि पार्वतीनाथ ॥२॥ 
 
करुणासागर शंभो शरणागतलोकरक्षणधुरीण ।
कारण समस्तजगतां कालान्तक पाहि पार्वतीनाथ ॥३॥ 
 
प्रणतार्तिहरणदक्ष प्रणवप्रतिपाद्य पर्वतावास ।
प्रणमामि तव पदाब्जे कालान्तक पाहि पार्वतीनाथ  ॥४॥ 
 
मन्दारनतजनानां वृन्दारकवृन्दगेयसुचरित्र ।
मुनिपुत्रमृत्युहारिन् कालान्तक पाहि पार्वतीनाथ ॥५॥ 
 
मारारण्यदवानल मायावारीन्द्रकुंभसञ्जात ।
मातङ्गचर्मवासः कालान्तक पाहि पार्वतीनाथ ॥६॥
 
 मोहान्धकारभानो मोदितगिरिजामनःसरोजात ।
मोक्षप्रद प्रणमतां कालान्तक पाहि पार्वतीनाथ ॥७॥
 
 विद्यानायक मह्यं विद्यां दत्त्वा निवार्य चाविद्याम् ।
विद्याधरादिसेवित कालान्तक पाहि पार्वतीनाथ ॥८॥
 
कालान्तकाष्टकमिदं पठति जनो यः कृतादरो लोके
कालान्तकप्रसादात्कालकृता भीर्न संभवेत्तस्य ॥९॥
 
 इति कालान्तकाष्टकं संपूर्णम् ॥