निश्चाचा महामेरू। बहुत जनांसी आधारू। अखंड स्थितीचा निर्धारू। श्रीमंत योगी।। या भूमंडळीचे ठायी। धर्मरक्षी ऐसा नाही। महाराष्ट्र धर्म राहिला काही। तुम्हा कारणे ।। कित्येक दृष्ट संहारिले। कित्येकासी धाक सुटले। कित्येकासी आश्रय जाले। शिवकल्याण राजा।। या समर्थ रामदास स्वामींच्या पंक्ती आठवल्या की छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या महान कर्तृत्वाचा आलेख डोळ्यासमोर हिमालयासारखा...