Dharma Sangrah
✕

पुलवामाचा बदला, भारतीय सेनेने केले ट्विट- आम्ही क्षमाशील आहोत पण भित्रे नाहीत

Updated: मंगळवार, 26 फेब्रुवारी 2019 (11:56 IST)
 
दिनकरजी यांची कविता
 
 
शक्ति और क्षमा
क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल
सबका लिया सहारा
पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे
कहो, कहाँ, कब हारा?
क्षमाशील हो रिपु-समक्ष
तुम हुये विनत जितना ही
दुष्ट कौरवों ने तुमको
कायर समझा उतना ही।
 
अत्याचार सहन करने का
कुफल यही होता है
पौरुष का आतंक मनुज
कोमल होकर खोता है।
 
क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंतहीन
विषरहित, विनीत, सरल हो।
 
तीन दिवस तक पंथ मांगते
रघुपति सिन्धु किनारे,
बैठे पढ़ते रहे छन्द
अनुनय के प्यारे-प्यारे।
उत्तर में जब एक नाद भी
उठा नहीं सागर से
उठी अधीर धधक पौरुष की
आग राम के शर से।
 
सिन्धु देह धर त्राहि-त्राहि
करता आ गिरा शरण में
चरण पूज दासता ग्रहण की
बँधा मूढ़ बन्धन में।
 
सच पूछो, तो शर में ही
बसती है दीप्ति विनय की
सन्धि-वचन संपूज्य उसी का
जिसमें शक्ति विजय की।
 
सहनशीलता, क्षमा, दया को
तभी पूजता जग है
बल का दर्प चमकता उसके
पीछे जब जगमग है।
उत्तर में जब एक नाद भी
उठा नहीं सागर से,
उठी धधक अधीर पौरुष की,
आग राम के शर से।

सर्व पहा

देवी दुर्गेच्या नऊ रूपांची नावे, महत्त्व आणि प्रत्येक रूपाची पूजा करण्यामागील कारण

नवरात्रीत दुर्गा सप्तशती, देवी कवच की अर्गला स्तोत्र? कोणत्या पाठाचे काय महत्त्व आहे?

शारदीय नवरात्रि 2026: नवरात्रीत घटा जवळ अखंड दिवा लावत असाल, तर या गोष्टींची काळजी घ्या

पोवळा कोणी घालू नये? जाणून घ्या कोणत्या राशींसाठी मूंगा शुभ अन् काय आहेत नियम!

नवरात्रीच्या नऊ दिवसांत देवीला कोणती फुले वाहतात? दिवसानुसार फुलांची माहिती

पुढील लेख
Show comments