|
क्रमांक |
महीना |
नक्षत्र |
|
01 |
चैत्र |
चित्रा |
|
02 |
वैशाख |
विशाखा |
|
03 |
ज्येष्ठ |
ज्येष्ठा |
|
04 |
आषाढ |
उत्तराषाढा |
|
05 |
श्रावण |
श्रवण |
|
06 |
भाद्रपद |
पूर्व भाद्रपद |
|
07 |
अश्विन |
अश्विनी |
|
08 |
कार्तिक |
कृतिका |
|
09 |
मार्गशिर्ष |
मृग |
|
10 |
पौष |
पुष्य |
|
11 |
माघ |
मघा |
|
12 |
फाल्गुन |
पूर्वाफाल्गुन |
वार : एका दिवस़, रात्रीत चोवीस तास असतात प्रत्येक होरा एका तासाच्या बरोबर असतो. तासाचाच दुसरा भाग होरा आहे, असेबी म्हटले जाते. सात ग्रहांच्या पहिल्या होर्यावरून सात दिवसांची (वारांची) नावे ठेवली आहे ती अनुक्रमे
|
01 |
रविवार |
|
02 |
सोमवार |
|
03 |
मंगळवार |
|
04 |
बुधवार |
|
05 |
गुरुवार |
|
06 |
शुक्रवार |
|
07 |
शनिवार |
ज्योतिषशास्त्रानुसार अवकाशात शनी, गुरू, मंगळ, रवी, शुक्र, बुध तसेच चंद्र या सात ग्रहांची स्थिती एकाखाली एक आहे असे मानले आहे. अर्थात शनी सर्वांत वर व सगळ्यात खाली चंद्र.
गुरुवार, बुधवार, सोमवार व शुक्रवार हे चार वार 'सौम्य संज्ञक' तसेच मंगळवार, रविवार व शनिवार हे तीन वार 'क्रूर संज्ञक' मानले जातात. कोणतेही कार्य करण्यासाठी 'सौम्य संज्ञक' वार चांगले मानले जातात प्रत्येक वाराचा स्वामी हा त्या वाराचा अधिपती ग्रह असतो.
1. बव 2. बालव 3. कौलव 4. तैतिल 5. गर 6. वणिज 7. विष्टी 8. शकुनी 9. चतुष्पाद 10. नाग 11. किंस्तुघ्न या करणांपैकी पहिले 7 करण चर संज्ञक व शेवटचे 4 करण स्थिर संज्ञक आहेत.