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श्री बगलामुखी चालीसा

Updated: रविवार, 4 मे 2025 (09:59 IST)
अरि अरिष्ट सोचे जो जन को , बुध्दि नाशकर कीलक तन को |१७ |
हाथ पांव बाँधहु तुम ताके,हनहु जीभ बिच मुद्गर बाके |१८ |
चोरो का जब संकट आवे , रण में रिपुओं से घिर जावे |१९ |
अनल अनिल बिप्लव घहरावे , वाद विवाद न निर्णय पावे |२० |
मूठ आदि अभिचारण संकट . राजभीति आपत्ति सन्निकट |२१ |
ध्यान करत सब कष्ट नसावे , भूत प्रेत न बाधा आवे |२२ |
सुमरित राजव्दार बंध जावे ,सभा बीच स्तम्भवन छावे |२३ |
नाग सर्प ब्रर्चिश्रकादि भयंकर , खल विहंग भागहिं सब सत्वर |२४ |
सर्व रोग की नाशन हारी, अरिकुल मूलच्चाटन कारी |२५ |
स्त्री पुरुष राज सम्मोहक , नमो नमो पीताम्बर सोहक |२६ |
तुमको सदा कुबेर मनावे , श्री समृद्धि सुयश नित गावें |२७ |
शक्ति शौर्य की तुम्हीं विधाता , दुःख दारिद्र विनाशक माता |२८ |
यश ऐश्वर्य सिद्धि की दाता , शत्रु नाशिनी विजय प्रदाता | २९ |
पीताम्बरा नमो कल्यानी , नमो माता बगला महारानी |३०|
जो तुमको सुमरै चितलाई ,योग क्षेम से करो सहाई |३१ |
आपत्ति जन की तुरत निवारो , आधि व्याधि संकट सब टारो |३२ |
पूजा विधि नहिं जानत तुम्हरी, अर्थ न आखर करहूँ निहोरी |३३ |
मैं कुपुत्र अति निवल उपाया , हाथ जोड़ शरणागत आया |३४ |
जग में केवल तुम्हीं सहारा , सारे संकट करहुँ निवारा |३५ |
नमो महादेवी हे माता , पीताम्बरा नमो सुखदाता |३६ |
सोम्य रूप धर बनती माता , सुख सम्पत्ति सुयश की दाता |३७ |
रोद्र रूप धर शत्रु संहारो , अरि जिव्हा में मुद्गर मारो |३८|
नमो महाविधा आगारा,आदि शक्ति सुन्दरी आपारा |३९ |
अरि भंजक विपत्ति की त्राता , दया करो पीताम्बरी माता | ४० |
रिद्धि सिद्धि दाता तुम्हीं , अरि समूल कुल काल |
मेरी सब बाधा हरो , माँ बगले तत्काल ||
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