सोमवार, 26 सप्टेंबर 2022
  1. धर्म
  2. हिंदू
  3. आरती संग्रह
Written By
Last Updated: शनिवार, 7 मे 2022 (08:31 IST)

श्रीनृसिंहाची आरती

कडकडिले स्तंभ गडगडिलें गगन।
अवनी होत आहे कंपायमान।
तडतडलीं नक्षत्रे पडताती जाण।
उग्ररूपें प्रगटे सिंहवदन।। १ ।।
 
जय देव जय देव जय नरहरिराया।
आरती ओवाळू महाराजवर्या।
जय देव जय देव ।।
एकविस स्वर्गमाळा डळमळली कैसी।
ब्रह्मयाच्या वाटे अभिनव चित्तासी।
चंद्रसूर्य दोनी लोपति प्रकाशीं।
कैलासीं शंकर दचके मानसीं।। २ ।।
 
जय देव जय देव जय नरहरिराया।
आरती ओवाळू महाराजवर्या।
जय देव जय देव ।।
थरथरती त्या जटा जिव्हा लळलळित।
तीक्ष्ण नखांनीं  दैत्य तो विदारीत।
अर्धांगी कमलजा शिरीं छाया धरित।
माधवदासा स्वामी नरहरि शोभत।। ३ ।।
 
जय देव जय देव जय नरहरिराया।
आरती ओवाळू महाराजवर्या।
जय देव जय देव ।।