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Last Modified मंगळवार, 7 डिसेंबर 2021 (16:51 IST)

विवाह पंचमी : श्री राम-जानकी स्तुति वाचा, इच्छित जीवनसाथी मिळेल आणि नशीब उजळेल

दरवर्षी मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमीला विवाह पंचमी साजरी केली जाते. या दिवशी सीता आणि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम यांचा विवाह झाला होता. या दिवशी भगवान श्रीराम-देवी सीतेचं व्रत-पूजन, उपवास ठेवून मनपूर्वक, श्रद्धापूर्वक सीता- प्रभु श्रीरामाची उपासना केल्याने व्रत करणार्‍या जातकाच्या सर्व इच्छा पूर्ण होतात.
 
या दिवशी विवाह योग्य जातक शुद्ध मनाने पूजन करतात तर निश्चितच त्यांना योग्य जीवनसाथीदाराची प्राप्ती होते. इतकंच नव्हे तर विवाहितांच्या सौभाग्यात वृद्धी होते आणि सोबतच योग्य जीवनसाथीदार मिळतो. विवाह पंचमीला माता सीता आणि प्रभु श्रीराम यांची स्तुति अवश्य करावी-
 
श्रीराम स्तुति Shri Ram Stuti
 
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
 
कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरम्।
 
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
 
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
 
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
 
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
 
छंद :
 
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
 
एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

।।सोरठा।।
 
जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
 
श्री जानकी स्तुति Shri Janki Stuti
 
जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्।
जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्।।1।।
 
दारिद्र्यरणसंहर्त्रीं भक्तानाभिष्टदायिनीम्।
विदेहराजतनयां राघवानन्दकारिणीम्।।2।।
 
भूमेर्दुहितरं विद्यां नमामि प्रकृतिं शिवाम्।
पौलस्त्यैश्वर्यसंहत्रीं भक्ताभीष्टां सरस्वतीम्।।3।।
पतिव्रताधुरीणां त्वां नमामि जनकात्मजाम्।
अनुग्रहपरामृद्धिमनघां हरिवल्लभाम्।।4।।
 
आत्मविद्यां त्रयीरूपामुमारूपां नमाम्यहम्।
प्रसादाभिमुखीं लक्ष्मीं क्षीराब्धितनयां शुभाम्।।5।।
 
नमामि चन्द्रभगिनीं सीतां सर्वाङ्गसुन्दरीम्।
नमामि धर्मनिलयां करुणां वेदमातरम्।।6।।
पद्मालयां पद्महस्तां विष्णुवक्ष:स्थलालयाम्।
नमामि चन्द्रनिलयां सीतां चन्द्रनिभाननाम्।।7।।
 
आह्लादरूपिणीं सिद्धिं शिवां शिवकरीं सतीम्।
नमामि विश्वजननीं रामचन्द्रेष्टवल्लभाम्।
सीतां सर्वानवद्याङ्गीं भजामि सततं हृदा।।8।।
 
।।सियावर रामचंद्र की जय।।