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दत्तदशक स्तोत्र | Datta Dashak Stotra श्री दत्तात्रेयांची कृपा, संरक्षण आणि मनोकामना पूर्ण करणारे प्रभावी स्तोत्र

अथध्यानम:
माळा कमंडलु लसे कर नीचलामां
डमरु त्रिशूळ वचला करमां विराजे
ऊंचा द्विहस्त कमले शुभ शंखचक्र
एवा नमुं विधि हरीश स्वरुप दत्त
 
भवभयहारक श्रीहरि प्रणमुं वारंवार |
जन्ममरण टाळी विभो करो शीघ्र भवपार ||
 
रेवातटवासी नमुं, वासुदेव यतिराय |
मदन मनोहर मूर्ति शी! लागुं पुनि पुनि पाय ||
 
नानारुपे तुं वसे, नानानामे एक |
भक्तजनोने कारणे धारे विध विध भेख ||
 
जन्म्युं नोतुं आ कशुं, हतो त्याहरे तुं ज |
रहेशे ना आ तोये तुं होईश सच्चित पुंज ||
 
मन बांधे मन छोडवे, रच्युं मने आ सर्व |
नाना नेह कथे श्रुति एक अनेके शर्व ||
 
दत्त कहे कोई तने रामकृष्ण वळी कोक |
दिनमणि शिवशक्त्यादि तुं नामरुप सहु फोक ||
 
गंगा यमुना सरस्वती भिन्न नाम जे छेक |
बहुरुपी बहुनाममां जळरुपे सहु एक ||
 
रसना नाम रटे भले चित्त लक्ष्यमां होय|
भवे भावथी भव मळे भक्त स्वयंभव होय||
 
जन्म मरण तेने नही स्वयं जनार्दन एह |
रेवा सागरमां भळे रहे भिन्न क्यां तेह ||
 
महातपस्वी योगीओ भेदे गोथां खाय |
नानात्मैक्यज्ञानथी रंग पार थई जाय ||
 
दत्त दशक आ जे पढे राखी लक्ष्यमां ध्यान |
दत्त कृपा ए पर थई पामे नर निर्वाण ||
Edited By - Priya Dixit